जोधपुर के मेहरानगढ़ किला में जीवित बलि राजाराम जी मेघवंशी (कड़ेला) ने दी।
दियो बत्तीसों राजाराम, जद मंडियों मेहराण। ऊच नीच रे कारणे, ना राखियो नाम निशान।। ना राखियो नाम निशान,जोधाणो बेरंग लागे। ना छतरी ना मुरत ज्यारी,गढ जोधाणे आगे।। रणबंका राठौड़ , क्यु भुलिया थे अहसाण। दियो बत्तीसों राजाराम,जद मण्डियों मेहराण अमर शहीद राजाराम मेघवाल शेर नर राजाराम मेघवाल भी जोधपुर नरेशो के हित के लिए बलिदान हो गए थे !मोर की पुंछ के आकर !वाले जोधपुर किले की नीव जब सिंध के ब्राह्मण ज्योतिषी गनपत ने राव जोधाजी के हाथ से वि ० स० 1516 में रखवाई गई तब उस नीव में मेघवंशी राजाराम जेठ सुदी 11 शनिवार (इ ० सन 1459 दिनाक 12 मई ) को जीवित चुने गए क्यों की राजपूतो में यह एक विश्वास चला आ रहा था की यदि किले की नीव में कोई जीवित पुरुष गाडा जाये तो वह किला उनके बनाने वालो के अधिकार में सदा अभय रहेगा !इसी विचार से किले की नीव में राजाराम (राजिया )गोत्र कडेला मेघवंशी को जीवित गाडा गया था ! उसके उअपर खजाना और नक्कार खाने की इमारते बनी हुई हैं ,इनके साथ गोरा बाई सती हुई थी !राजिया के सहर्ष किये हुए आत्म त्याग एवम स्वामी भक्ति की एवज में राव जोधाजी राठोड ने उनके वंशजो को ज...